बेटियां... आंखों का कांटा नहीं, तारा है बेटियां
कुदरत का दिया खूबसूरत तोहफा होती है बेटियां मायके को खुशियों से रोशन करती हैं बेटियां ससुराल में पति के नाम पर अपना अस्तित्व खोजती है बेटियां कहने को बेटे समान है बेटियां फिर भी समाज में तड़पाई जाती है बेटियां मां बाप से ज्यादा कौन समझ सकता है कितनी अहम है बेटियां बेटा साथ भले ना दे मरते दम तक साथ देती हैं बेटियां प्यार समर्पण त्याग की मूर्ति है बेटियां फिर भी सुनती है किसी काम की नहीं है बेटियां दिल पर पत्थर रख मायका छोड़ती है बेटियां फिर भी ससुराल में ताने सुनती है बेटियां क्या दर्द समझेगा कोई जो सहती है बेटियां दो घर होने के बाद भी बेघर होती है बेटियां बेटी बहन पत्नी मां बनकर साथ निभाती है बेटियां हर किरदार में साथ मिले यही चाहती हैं बेटियां जब तक हां करें सुशील होती हैं बेटियां जो दिल की सुने संस्कार हीन बन जाती है बेटियां बेटे के लिए खुला आसमां बंदिश में आज भी है बेटियां जिस घर में जन्मी वहीं पराई बन जाती होती है बेटियां आजादी के दौर में आज भी हवस का शिकार होती है बेटियां आधुनिक समाज में कई जग...
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