14 सितंबर तक सिमट गई हिंदी... अंग्रेजियत के हावीपन ने कम की हिंदी की हैसियत !
10 साल में हिंदी भाषी 10 करोड़ बढ़े
5 साल में दक्षिण में हिंदी सीखने वाले 22% बढ़े
शब्दकोश में शब्द 20 हजार से बढ़कर 1.5 लाख हो गए
इंटरनेट में हिंदी 94% की दर से बढ़ रही है
हिंदी को एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए आज ही के दिन 1949 को एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया था जहां देश के संविधान ने देवनागरी लिपि को दर्जी दी और हिंदी को आधिकारिक राजभाषा का दर्जा मिला। समय बदला है जिसमें कई बदलाव हुए हैं और इस बदलाव में अंग्रेजी इस कदर हावी हुई है कि कहीं न कहीं हिंदी की हैसियत घट गई है। विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा में हिंदी एक है, सोशल मीडिया में हिंदी अभिव्यक्ति का एक प्रमुख जरिया है, दुख होता है अपना वर्चस्व करने के बावजूद आज हिंदी उस तर्ज पर सम्मान नहीं पाती जो उसका हक है अधिकार है क्योंकि अंग्रेजी का दिखावा अपनी ही हिंदी के मान सम्मान को दिखावे की चकाचौंध में खो दे रहा है और हिंदी 14 सितंबर तक सीमित रह जा रही है।
सही है कि अंग्रेजी जरूरत है लेकिन इसे हिंदी पर हावी न होने दें, क्योंकि विश्व के मंच पर हिंदी में वह कर दिखाया है जो बाकी भाषा न कर सके सकी है। ऑक्सफोर्ड की डिक्शनरी में सूर्य नमस्कार, आत्मनिर्भर संविधान हिंदी के शब्द है जो अपनाया गया है। उसी तरह हिंदी के शब्द गुरु, खाकी को अंग्रेजी ने अपनाया है। यह शब्द उदाहरण है हिंदी के गुरुत्व का जो गर्व महसूस कराते हैं कि हम हिंदू हैं और हिंदी मान हमारा, सम्मान है हमारा।
हिंदी की खासियत है कि इसमें जिस शब्द को जिस तरह से उच्चारित किया जाता है, उसी तरह लिखा भी जाता है।
आज देश में 46 करोड़ से अधिक की जनसंख्या हिंदी भाषा का प्रयोग करती है, खासकर उत्तर भारत के लोग हिंदी में विचारों का आदान प्रदान करते हैं। मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद, टोबैगो और नेपाल में हिंदी बोली जाती है।
साउथ पैसिफिक महासागर के ओशेनिया में बसे द्वीप देश फिजी है। जानकर हैरानी होगी लेकिन फिजी में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है। इसे फ़िजियन हिन्दी या फ़िजियन हिन्दुस्तानी कहते हैं।
विश्व के 176 विश्वविद्यालयों में हिन्दी एक विषय के तौर पर पढ़ाई जाती है।
विश्व के मंच पर हिंदी पहचान की मोहताज नहीं है लेकिन अपने ही देश में जिस तरह विदेशी भाषा को हिंदी की तुलना में अधिक तरजीह दी जा रही है उससे लगता है कि हिंदी के मान सम्मान के लिए लोग सिर्फ 14 सितंबर का ही इंतजार करेंगे और एक दिवस के तौर पर हिंदी का मान बढ़ाएंगे।
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