262 साल पहले इस अंग्रेज ने शुरू की थी दुर्गापूजा !
दुर्गा पूजा और बंगाल का रिश्ता आज का नहीं बल्कि 262 साल पुराना है। जितनी भव्यता के साथ बंगाल में दुर्गा पूजा का आयोजन होता है, वह विश्व विख्यात है। विश्व मंच पर भी बंगाल की दुर्गा पूजा की सराहना की जाती है। सवाल ये उठता है कि आखिर दुर्गा पूजा का आगाज कब से हुआ ? इसे लेकर कई दिलचस्प कहानियां हैं मगर सबसे मशहूर किस्सा प्लासी के युद्ध से जोड़ा जाता है, जिसके बाद से ही बंगाल में दुर्गा पूजा की आराधना शुरू की गई। उसके बाद से देश के बाकी हिस्सों में भी दुर्गा पूजा आयोजित की जाने लगी। हालांकि बंगाल के बाद सबसे अधिक पूजा के लिए जो राज्य जाना जाता है वह पटना है, लेकिन बंगाल जैसी बात किसी और राज्य में नहीं हैै।
कहा जाता है कि 1757 में प्लासी के युद्ध में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराने के बाद रॉबर्ट क्लाइव ने भगवान को धन्यवाद कहने की इच्छा जताई थी मगर सिराजुद्दौला ने सभी चर्च नष्ट कर दिए थे इस दौरान अंग्रेजों के सबसे हिमायती राजा कहे जाने वाले नव कृष्ण देव ने क्लाइव को प्रस्ताव दिया कि वह मां दुर्गा की आराधना करें जिस पर क्लाइव तैयार हो गया और उसी वर्ष कोलकाता में भव्य दुर्गा पूजा का आयोजन कराया गया जो परंपरा आज तक चली आ रही है।
कृष्ण देव के राज बाड़ी में हुई थी मां की आराधना
कहते हैं कृष्ण देव के राजबाड़ी में मां दुर्गा की पूजा की गई थी। पूरे कोलकाता को भव्य तरीके से सजाया गया था, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आए थे। कहा यह तक जाता है कि उस वक्त वर्मा और श्रीलंका से नृत्यांगना बुलाई गई थी और रॉबर्ट क्लाइव ने हाथी पर बैठकर दुर्गा पूजा का आनंद उठाया था। वही मां दुर्गा की प्रतिमा की बात करे तो कृष्ण नगर के महान कारीगरों ने इसे तैयार किया था।
पेंटिंग में कैद है उस वक्त की झलकियां
कह सकते हैं पहली बार आयोजित की गई दुर्गा पूजा को पेंटिंग में बकायदा कैद किया गया है। यह पेंटिंग आज भी कृष्णदेव के राजबाड़ी में लगी हुई है, इसी पेंटिंग की तर्ज पर पहली दुर्गा पूजा की कहानी मानी जाती है।
जमीदारों ने रसूख कायम करने के लिए शुरू की दुर्गा पूजा
कहते है कृष्ण देव द्वारा अंग्रेजों को दिए इस प्रस्ताव के बाद बंगाल के जितने जमीदार हैं उन्होंने अपने रौब और रसूख को कायम रखने के लिए अपने अपने तरीके से दुर्गा पूजा का आयोजन करना शुरू किया। धीरे-धीरे दुर्गा पूजा इस कदर लोकप्रिय हुई कि आज विश्व मंच पर इस का मान देखा जा सकता है। दुर्गा पूजा की शुरुआत को लेकर और भी कहानियां है जिसे आधार बनाया जा सकता है मगर प्लासी के युद्ध से जोड़कर जो कहानी है इसे ही ठोस आधार कई लोग मानते आ रहे हैं।
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