आजादी : कंगना ने आंखें खोली या नजरंदाज किया मनु, मंगल और भगत की शहादत को...
1857 में आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी। इसमें सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर ने हिस्सा लिया था। लेकिन 1947 में आजादी के लिए कौन सा युद्ध लड़ा गया था? मुझे तो इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर कोई मुझे इस बारे में जानकारी दे दे तो मैं माफी तो मांगूंगी ही, साथ ही पद्मश्री भी लौटा दूंगी।
कंगना रनौत का यह बयान उस वक्त आया जब देशभर में कंगना के पहले बयान (देश को आजादी 2014 में मिली, 1947 की आजादी तो भीख में मिली थी।) पर बवाल मचा। देश के सम्मानीय अवार्ड पद्मश्री मिलने के कुछ घंटों के बाद आये कंगना के इस बयान ने काफी सवाल खड़े किए। भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया तक ने कह दिया कि पार्टी कंगना के इस बयान से ताल्लुक नहीं रखती है।
ऐसे में कंगना का खुद (बचाव) के लिए प्रतिक्रिया आना लाजमी था। कंगना ने जो कहा वह उनकी विचारधारा कम और बड़बोलेपन को अधिक दर्शा रहा है। अब उनका दूसरा बयान साफ दिख रहा है कि शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। पढ़ने वालों को साफ दिख रहा है कि कंगना ने अपने डिफेंड में दूसरा बयान या कहे चैलेंज रूपी प्रतिक्रिया दी है। विचारों में बेमेल हो ही सकता है, इसका कतई मतलब यह नहीं कि आप एक व्यक्तिविशेष को दरकिनार करने के लिए देश के लिए क्या कुछ न कर गुजरने वालों के त्याग और बलिदान को नजरअंदाज कर दें।
झांसी की रानी घोड़े पर सवार थी, लड़ते हुए देश के लिए शहीद हुई...इस त्याग और बलिदान को नमन। युद्ध सिर्फ घोड़े पर सवार राजा या सेनापति नहीं लड़ता, शहीद वो सैनिक भी होते है जो भाला लेकर जमीनी लड़ाई लड़ते हुए दम तोड़ते है...इन्हें नजर अंदाज करना इतिहास को शर्मिंदा करने जैसा है। आजादी की किसी एक के विचारधारा से नहीं मिली इसके लिए कई लोगों ने खून बहाया है...इतना भी न गिरो कि इतिहास शर्मिंदा हो जाएं।
बयानों की इस जंग में कंगना को मिले पद्मश्री सम्मान को घसीटा जा चुका है। हालांकि ऐसा होना नहीं चाहिए सम्मान उनकी प्रतिभा और फिल्मों में उनके योगदान के लिए मिला है न कि बयानों की सलाखों के कारण कंगना इस सम्मान तक पहुंचीं है। हां इतना जरूर है, इन सम्मान से परे खुद की जुबान को इतना शालीन रखना अति आवश्यक है क्योंकि फिसलती जुबां कई बार आपकी शख्सियत को एक दूसरा ही कोण दे देती है जिसमें संभवत: देशभक्ति से ज्यादा चाटुकारिता झलकने लगती है और असम्मान पद्मश्री जैसे सम्मान हो होने लगता है।
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