टेम्स तो न बना पाएँ पवित्र यमुना को यमुना ही बना देते!
समुद्र में तैरता ग्लेसियर नहीं, ये दिल्ली की झाग झाग हुई यमुना है
1994 से अबतक सिर्फ निर्देश आए वादें हुए और ज़हरीली होती गयी झागयुक्त यमुना…
राजनीतिक दांवपेच कहें या प्रशासन की लापरवाही, खामियाजा उठाना पड़ रहा है हमारे देश की पूजनीय नदियों को। कहीं गंगा मैली हो रही है तो कहीं यमुना झाग झाग होकर जहरीली बन गई है।
2005 में केंद्र सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि यमुना को लंदन की टेम्स नदी की तर्ज पर सजाने और
प्रदूषण मुक्त कराने की रणनीति तैयार की है, केंद्र की योजना को न्यायालय ने हरी झंडी भी दी लेकिन टेम्स तो दूर यमुना पहले से ज्यादा मैली हो गयी।
2016 में केजरीवाल सरकार ने भी दावा किया था
यमुना नदी को टेम्स नदी जैसा बनाने का जो अब तक वादा ही रहा।
अब रुख़ करते है अदालत का 2015 एनजीटी ने निर्मल यमुना पुनरुद्धार परियोजना आगे बढ़ाते हुए यमुना नदी की सफाई के लिए विस्तृत निर्देश दिये थे, लेकिन यह परियोजना भी अधर में लटकी है।
जुर्माने तक का प्रावधान है मगर यमुना की कायापलट नहीं हो पाई। एनजीटी की तरफ से यमुना में निर्माण सामग्री फेंकने पर 50000 तक का जुर्माना लगाने का निर्देश था जो शुरू शुरू में काफी अच्छे से पालित किया गया लेकिन अब इसका प्रभाव कहीं दिखता नजर नहीं आ रहा।
यमुना नदी की लंबाई 1400 किलोमीटर है जो उत्तराखंड से हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और प्रयागराज तक बहती है। यमुना की कुल लंबाई का सिर्फ 22 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में पड़ता है यानी यमुना की कुल लंबाई का सिर्फ 2 फ़ीसदी हिस्सा दिल्ली में पड़ता है जिसमें दिल्ली का 80 फ़ीसदी प्रदूषण यह यमुना झेलती आ रही है इसका कारण यमुना में गिर रहे कचरे का अंबार है जिसका 29 फ़ीसदी हिस्सा कूड़ा सिर्फ दिल्ली का होता है।
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