पवित्र है, मां है फिर भी मैली होती हैं गंगा...
विस्तार है अपार... प्रजा दोनों पार...
ओ गंगा तू बहती है क्यों...
मैली हो रही गंगा के पवित्र पानी को स्वच्छ कैसे रखना है, घाटों की सफाई कैसे करनी है, इसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से तमाम कोशिशें की जाती रही हैं। मोदी सरकार की तरफ से इसे लेकर नमामि गंगे योजना तक चालू की गयी है जिसमें गंगा के साथ बाकी नदियों के कायाकल्प के लिए परियोजनाओं को चालू किया गया, बावजूद इसके गंगा के किनारे बसे शहरों का हाल ऐसा है जहां सरकारी प्रयास तो जारी है लेकिन लोगों में जागरूकता के अभाव ने इन प्रयासों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। बहरहाल मैली तो गंगा हो रही है जिसके लिए लोगों का सचेत होना जितना जरूरी है उतना ही सख्त रवैया सरकारों को अपनाना होगा, तभी पवित्र मानी जाने वाली गंगा को हम प्रदूषण मुक्त रख पाएंगे।
गंगा के किनारे बसे 5 राज्य बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और पश्चिम बंगाल के कुल 97 टाउन सिटी की रिपोर्ट पेश की गयी है। रिपोर्ट की माने तो कोलकाता के ज्यादातर घाटों पर सफाई न के बराबर है। इन घाटों में सफाई का पैमाना घाटों के आसपास लगे वैट की दशा कैसी है, नालों से गंगा तक जाने का प्वाइंट कैसा है, घाटों पर गंदगी न फैलाने के लिए क्या अभियान है, कचरा हटाने की व्यवस्था क्या है, इस पर रिपोर्ट तैयार की गयी है। इस आधार पर गंगा टाउन की रैंकिंग की गयी है। यह प्रक्रिया बराबर चलती रहती है। जिसे लेकर राज्यों से जवाब तलब भी किया जाता है। राज्यों की ओर से जवाब में कहा भी जाता है कि सब ठीक है लेकिन वास्तविकता कुछ और ही बयां करती है। दरअसल गलती न सरकार की है न प्रशासन की। कमी तो आमजनों में है जो उतने गंगा को मां तो मानते है लेकिन बात जब सफाई की आती है तो यह गंगा मैली करने से लोग पीछे नहीं हटते है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से 30 लोगों की टीम ने हाल ही में 5 राज्यों के 643 घाटों का जायजा लिया। बहरहाल सरकारी दावों का क्या वह तो किए जाते रहेंगे। असलियत यह है कि आम जनता में जब तक गंगा को लेकर जागरूकता नहीं आती, लोग इसे मैली करते रहेंगे।
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