मर रही मानवता…मौत एक का मातम दूसरे के लिए बन रहा जश्न !
हर साँस जरुरी है जीने के लिए जो ये थमी ज़िंदगी ठहर जाती है और शख्स याद में तब्दील हो जाता है…
ज़िंदगी से अपनों का जाना कितना दुखद है यह हर किसी के समझ से परे है। कुछ दिन पहले की बात है एक सितारा ज़िंदगी से अलविदा कह गया।आँखे नम हुई, दिल दुखा, सिहरन भी हुई क्योंकि वह ज़िंदादिल था अपने माँ का दुलारा था।
यह खबर चौकाने वाली तो थी ही इससे भी दुखद या कहे हैरान करने वाला रहा कुछ लोगों की प्रतिक्रियाएँ जो मानवता को शर्मसार करने वाली प्रतीत हुई।मौत ज़िंदगी की सबसे बड़ों सच्चाई है इसे नकारा नहीं जा सकता…लेकिन मौत से एक घर में मातम और उसी मौत का दूसरा जश्न कैसे मना सकता है। वो भी उस इंसान के लिए जिसे आप अच्छी तरह जानते तक नहीं, सिर्फ़ सुर्ख़ियों में खबरें सुन लेने से किसी के बारे में राय बना लेना मेरे ख्याल से सबसे बड़ी मूर्खता है। लोग विचारधाराओं में बंटे है यह सच है लेकिन इस विचारधारा को किसी के मौत के साथ मिलाना कहीं से भी तर्कसंगत नहीं लगता है।
हमारा धर्म हमारी संस्कृति इसकी इजाज़त कतई नहीं देता कि मौत जैसे सत्य का मज़ाक़ उड़ायें, उसे अपने बेमेल शब्दों से गलत जगह पर महिमा मंडित करें। यह आचरण आपकी छवि औरों की नजर में गिराने के साथ ही साथ मानवता को भी शर्मसार करने वाला है।
हमारा सौभाग्य है कि हम सनातनी है, जो हमें एकजुटता की सीख सिखाता है। ख़ुशी में सब साथ होते है, दुःख वो घड़ी होती है जहां अपने-पराये का पता चलता है। मौत की सच्चाई वह धरातल है जहां हमें सही मायनों में पता चलता है कंधे से कंधा मिलाने वाला कौन है? माखोल का आवरण लेकर खिल्ली उड़ा कर जश्न मनाने वाला कौन है?
Nice
ReplyDeleteSuperb
ReplyDelete👌 वाह
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